Tuesday, October 11, 2022

रोहित की होशियारी


रोहित की होशियारी
                                                          -ईप्सा
रोहित के पापा का स्थानांतरण होशंगाबाद से मथुरा के लिए हुआ तो उसे बहुत खुशी हुई । उसकी मम्मी और पापा भी खुश थे कि ‘चलो मथुरा के मंदिरों के खूब दर्शन करेंगे ।’
रोहित अपने पापा एवं मम्मी के साथ मथुरा आ गया– आनेे के दूसरे दिन ही वे सभी बिहारी जी के मंदिर गए– वे कभी रंगनाथ जी के मंदिर जाते तो कभी अंग्रेज मंदिर कभी  पागल बाबा के मंदिर तो कभी किसी अन्य मंदिर मंे जाते रोहित के पापा ने जहां मकान लिया था उसके पास ही तुलसी मंदिर था– तुलसी मंदिर की बड़ी चर्चा थी कि वहां रात के समय कोई रुक नहीं सकता– यदि कोई रुकेगा तो वह सुबह तक मर जाएगा– मंदिर के पुजारी एवं अन्य लोगों से रोहित ने यही सुना कि वहां जब–जब कोई व्यक्ति जाने या अनजाने में रात के समय रुक गया तो दूूसरे दिन वह मरा हुआ ही मिला– यहां तक कि तुलसी मंदिर में रात के समय बन्दर भी नहीं रुकते थे–
रोहित ने जब यह बातें सुनी तो उसे आश्चर्य हुआ– वहां के लोग तो इस घटना को भूत–प्रेत का नाम दिया करते परन्तु रोहित को भूत–प्रेत में बिल्कुल विश्वास नहीं था– रोहित तुलसी मंदिर के विषय में गंभीरता से सोचने लगा– सबसे पहले रोहित ने तुलसी मंदिर की एक–एक चीज को गम्भीरता से देखने का निश्यच किया–
रोहित अपने पापा जी के साथ तुलसी मंदिर जाने लगा– रोज जाने से मंदिर के पुजारी जी से  भी उसकी पहचान हो गई– पुजारी जी ने भी वही सब कुछ बताया जो उसने अपने पड़ोस के लोगों से सुन रखा था–
पुजारी जी से पूछ कर रोहित एक दिन तुलसी मंदिर के अन्दर उस स्थान को देखने गया जहां रात को रुकने से अनेक लोगों की मृत्यु हो गई थी– यह घटनाएं पहले कभी हुई होंगाी क्योंकि अब तो वहां कोई रात में रुकने का साहस ही नहीं करता–
रोहित ने अच्छी तरह से देखा कि तुलसी मंदिर के अन्दर काफी जगह है– तुलसी के बड़े–बड़े पौ/ो वहां खड़े हैं– तुलसी के इतने बड़े और सघन पौ/ो उसने पहली बार यहां देखे– इन्हीं पौ/ाों के बीच में सीमेन्ट का एक छोटा सा चबूतरा है– यही वह चबूतरा है जिस पर रात के समय सोने वाला व्यक्ति सुबह तक मरा हुआ मिलता है–
रोहित ने एक–एक चीज का निरीक्षण किया और कुछ सोचने लगा– उसने अपने पापा जी से भी सलाह
 ली– वह अपने विज्ञान विषय के अ/यापक से भी मिला– रोहित ने अपने पापा जी एवं अपने शिक्षक से मिलकर एक योजना बनाई कि वह रात को तुलसी मंदिर के अंदर सोएगा– लोगों में तुलसी मंदिर को लेकर जो डर फैला हुआ था उसे वह निकाल देना चाहता था– सभी यह समझते थे कि तुलसी मंदिर में रात को कोई राक्षस आ जाता है–––––––– वही रुकने वाले को मार डालता है– 
रोहित अपने पापा के साथ तुलसी मंदिर गया और उसने पुजारी जी से कहा– “पुजारी जी आज रात को मैं मंदिर के अंदर सोऊंगा, आप कृपया इसकी अनुमति दें–”
पुजारी ने रोहित को बहुत समझाया कि वह जानबूझकर मौत के मुंह में क्यों जाना चाहता हैै–
रोहित बोला –“पुजारी जी आप चिन्ता न करें– न तो तुलसी मंदिर में कोई राक्षस है, और न मुझे कुछ होगा– आप बस रात को रुकने की मुझे अनुमति देदें– सुबह मैं आप सब को बताऊंगा कि तुलसी मंदिर का रहस्य क्या है ?”
रोहित के पापा ने भी पुजारी से कहा कि रोहित को रात में रुकने की अनुमति दे दें– पूरे   मोहल्ले मेें रोहित के रात भर तुलसी मंदिर में रुकने की बात फैल गई– कई लोगों ने रोहित के पापा और मम्मी को समझाया कि वे जानबूझकर अपने बच्चे को राक्षस के मुंह मंे क्यों /ाकेल देना चाहते हैं ?
रोहित के पापा एवं उसके विज्ञान के शिक्षक ने राक्षस से लड़ने कि पूरी व्यवस्था कर दी– और रोहित भी  मंदिर में रुकने के लिए ही शाम को ही पहुंच गया– मंदिर बंद होते समय रोहित को अंदर कर दिया गया– रोहित तुलसी के पौ/ाों से घिरे चबूतरे पर पहंुच गया– उसने हाथ हिला कर सबका अभिवादन किया और सबसे चले जाने के लिए कहा– 
रोहित को चबूतरे पर छोड़ कर सब बाहर आ गए–  पुजारी जी ने रोज की तरह बाहर से ताला लगा दिया–
रोहित ने चबूतरे पर अपनी चादर बिछाई और लेट गया– वह थोड़ी देर ही लेटा था कि उसे सांस लेेने में कुछ 

कठिनाई सी होने लगी– रोहित तो पहले से ही सजग था– 
राक्षस ने अपने हाथ बढ़ा दिए थे– अर्थात रात्र् िके समय तुलसी के अ/िाक पौ/ो होने से उनमें से कार्बनडाइर् ऑक्साइड गैस अ/िाक मात्र में निकलनी शुरू हो गई थी– जिससे ऑक्सीजन की कमी होने लगी– यही कारण था कि रोहित को सांस लेने में परेशानी हो रही थी– रोहित को पूरा रहस्य समझ में आ गया– अपने साथ ले गये ऑक्सीजन के सिलेंडर का मास्क अपनी नाक पर लगा लिया और आराम से सो गया– उसे अच्छी नींद आई– जब आंख खुली तो सबेरा हो गया था– 
मंदिर के बाहर काफी भीड़ एकत्र् हो गई थी– सबकेे चेहरे उतरे हुए थे–  पता नहीं रोहित जिंदा होगा भी या नहीं– रोहित के पापा तो निश्चिंत थे परन्तु उसकी मम्मी परेशान थीं कि पता नहीं उनका बच्चा कैसा होगा– 
पुजारी जी ने तुलसी मंदिर का द्वार खोला– भीड़ पुजारी जी के पीछे–पीछे तुलसी मंदिर के अंदर चबूतरे की ओर बढ़ गई– पुजारी जी “श्री रा/ो–श्री रा/ो” करते हुए चबूतरे की ओर बढ़े– चबूतरे पर रोहित लेटा हुआ था– रोहित ने भीड़ को आते देख ऑक्सीजन सिलेंडर तुलसी के पौ/ाों में छिपा दिया और आंखें बंद करके चबूतरे पर चुपचाप लेट गया– 
चबूतरे पर रोहित को बिना हिले डुले लेटे देख सब घबरा गये– रोहित के पापा ने रोहित को आवाज दी और जब रोहित ने कोई उत्तर नहीं दिया तो वे भी घबरा गये–
पुजारी जी कहने लगे, “मैं पहले ही कहता था कि राक्षस के मुंह में बच्चे को मत झोंको परन्तु मेरी नहीं मानी अब लो, राक्षस ने इसका काम तमाम कर ही दिया–”
तभी रोहित हंसते हुए उठा और कहने लगा, “पुजारी जी राक्षस ने मेरा काम तमाम नहीं किया बल्कि मैंने राक्षस का काम तमाम कर दिया है । यह रहा आपके राक्षस से लड़ने का यंत्र्–” रोहित ऑक्सीजन सिलेंडर और मास्क उठा कर सबको दिखाने लगा–
सभी आश्चर्य चकित थे कि यह चमत्कार कैसे हो गया– आखिर राक्षस ने रोहित को क्यों नहीं मारा–
रोहित को जीवित देखकर सब चुपचाप खड़े थे– रोहित ने सबको चुप देख कर कहा –“जिसे आप राक्षस समझते रहे वह कोई राक्षस–आक्षस नहीं था यह आप लोगों का भ्रम था यहां तुलसी के पौधे  इतने अ/िाक हैं और घने भी इसलिए रात को यह पौ/ो अ/िाक मात्र में कार्बनडाईआक्साइड गैस छोड़ने लगते हैं जिससे ऑक्सीजन की मात्र कम हो जाती है इसलिए जो भी यहां रुकता है उसे ऑक्सीजन की कमी होने से सांस लेने में परेशानी होती है और वह मर जाता है– मैं अपने साथ ऑक्सीजन का सिलेण्डर लाया था मुझे जब रात को सांस लेने में परेशानी हुई तो मैंने ऑक्सीजन सिलेण्डर की सहायता ली और अब आपके सामने जीवित खड़ा हूं–” बस यही इस तुलसी मंदिर का रहस्य है–
रोहित की बातों को सबने बड़े /यान से सुना–  सभी रोहित के साहस और उसकी होशियारी की प्रशंसा कर रहे थे– रोहत ने कहा कि उसके विज्ञान शिक्षक ने उसे बताया है कि प्रकृति में अनेक घटनायें घटती रहती हैं– जिन्हें हम समझ नहीं पाते हंै उन्हें भूत प्रेतोें से जोड़ लेते हैं– परन्तु प्रत्येक घटना के पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है– उन कारणों की खोज करनी चाहिए और हमें अपना /ौर्य नहीं खोना चाहिए–
रोहित अपने मम्मी पापा और विज्ञान शिक्षक के साथ विजयी मुस्कान लिए हुए अपने घर की ओर चल दिया– 
चारों ओर उसकी होशियारी समझदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की चर्चा हो रही थी–
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